'ऐक्टिंग ऐसा प्रफेशन है, जिसमें आपने 5 साल काम किया या 45 साल, वह अगले दिन काम नहीं आता। यहां हर दिन नया होता है, हर रोज नई चुनौती होती है और यही वजह है कि मैं इस प्रफेशन में हूं...' यह कहना है एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में लंबा सफर तय कर चुके ऐक्टर का। इन दिनों फिल्म '' में नजर आ रहे दिलीप इस सफर पर कहते हैं, ‘हर दिन चुनौती का सामना करना मुझे पसंद है। यह ईश्वर की कृपा है कि मुझे यह काम मिला, वरना मैं पागल होता या कहीं किसी को मार ही देता (हंसते हैं।) सेट पर मेरे लिए हर रोज अलग होता है, तभी मैं 45 साल से इस इंडस्ट्री में हूं। अगर मैं ये सोचता कि अरे यार, मैंने यह कल भी किया, परसों भी करने वाला हूं, तो मैं आज ऐक्टर नहीं होता। मैं सेट पर रोज फ्रेश आता हूं। मेरे लिए हर सीन अलग होता है, इसीलिए मैं ऐक्टर के तौर पर जिंदा हूं।’ हीरो के बाद विलन ही स्टार होता हैअपने इस लंबे करियर में दिलीप ताहिल ने काफी सारे नेगेटिव किरदार निभाए, लेकिन वह कहते हैं कि रोल चुनते वक्त किरदारों को कभी नेगेटिव या पॉजिटिव के रूप में नहीं देखते। वह कहते हैं, 'मैं कभी नेगेटिव-पॉजिटिव नहीं सोचता हूं। आप बताओ, फिल्म में हीरो के बाद कौन सा कैरेक्टर सबसे इंपॉर्टेँट होता है? विलन, जो हीरो और हीरोइन को दिक्कत देता है। उसके अलावा, कौन सा कैरेक्टर हिंदी मूवीज में करने के लायक है? इसलिए, अगर मैं हीरो नहीं हूं, तो मुझे नेगेटिव किरदार बहुत पसंद आते हैं। अगर वह न हो, तो कहानी कैसे बढ़ेगी? कहानी तो वहीं से बनती है न।' बकौल दिलीप, 'अभी भी लोग मुझसे कहते हैं कि फलाने के बाप का रोल है। मेरा कहना होता है कि फादर का रोल है, लेकिन फादर कर क्या रहा है? मैं रोल ऐसे चुनता हूं कि मेरे किरदार को निकालकर यह फिल्म बन सकती है या नहीं। अगर मेरे किरदार के बिना भी फिल्म बन सकती है, तो मैं नहीं करता हूं।' दशरथ बना था, लोग बोले दिलीप ताहिल का फिल्म 'बाजीगर' में निभाया किरदार मदन चोपड़ा अब भी बेहद पॉप्युलर है। वजह पूछने पर वह कहते हैं, 'मुझे खुद नहीं समझ में आता कि वह क्यों इतना पसंद किया गया। जब मैं हैदराबाद में 'सिया के राम' सीरियल की शूटिंग कर रहा था, जिसमें मैं राजा दशरथ था। एक दिन स्टूडियो के बाहर उसी गेटअप में बैठकर चाय पी रहा था। सिर्फ मुकुट नहीं था मेरे सिर पर, लेकिन राजा का पूरा कॉस्ट्यूम था। रामोजी स्टूडियो में टूरिस्ट आए और 10-12 लोग मेरी तरफ इशारे करने लगे। मुझे लगा, अच्छा है यार, इन लोगों ने 'सिया के राम' देखा है, अब राजा दशरथ के लिए मेरी तारीफ करेंगे, लेकिन पास आकर वे बोले, सर, मदन चोपड़ा। तब मुझे लगा कि ये मदन चोपड़ा मेरा पीछा नहीं छोड़ेगा।' जुनूनी थे शाहरुख, आमिर, सलमानदिलीप ताहिल ने आमिर, सलमान, शाहरुख जैसे सुपरस्टार्स के करियर के शुरआती दिनों में उनके साथ काम किया है। उनके इस शानदार सफर पर वह कहते हैं, 'आमिर, सलमान और शाहरुख तीनों में वह जुनून शुरू से दिखता था। आमिर जब 'कमायत से कमायत' तक कर रहे थे, तभी फिल्म में बेहद इंवॉल्व थे। जब हम 'दीवाना' कर रहे थे, तब शाहरुख दिल्ली से आया हुआ नया लड़का था, लेकिन जाने-माने डायरेक्टर राज कंवर को बता रहा था कि मैं यह ऐसे करने वाला हूं। मैंने कहा कि यार, क्या है ये लड़का, इतना कॉन्फिडेंस। वैसे ही, सलमान को मैंने जंगलबुक में मोगली के लिए रेकमंड किया। पर सलमान को रोल नहीं मिला, तब सलमान ने कोई फिल्म नहीं की थी, पर पता है उसने क्या कहा- दिलीप, यह उनका लॉस है।' 15-20 साल पहले नहीं बन पाती मिशन मंगल जैसी फिल्मबकौल दिलीप, 'मिशन मंगल' जैसी फिल्म अगर हम 15 या 20 साल पहले बनाना चाहते, तो कोई पैसे नहीं देता, क्योंकि एक जमाना था जब ऐसी फिल्में बनती ही नहीं थीं। अगर बनती थी, तो सब नकली होता था, पर जिस तरह से डायरेक्टर जगनशक्ति, निर्माता अक्षय कुमार और आर बाल्की ने यह फिल्म बनाई है, वह कमाल है। ऐसी स्पेस ट्रैवल वाली फिल्में हमारे यहां कहां बनी हैं? इसरो ने हमारे देश के लिए जितना काम किया है, हमें उनको दाद देनी चाहिए। मुझे गर्व है कि मैं इस फिल्म का हिस्सा हूं।
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